वस्तु और सेवा कर का लागु होना भारतीये अर्थव्यवस्था के इतिहास में एक ऐसा क्रन्तिकारी घटना है जो व्यक्ति के आर्थिक जीवन के सभी पहलु को किसी न किसी प्रकार से प्रभावित करेगा। अर्थतंत्र के सरलीकरण तथा एकल राष्ट्र कर के परिणाम से कर प्रशासन में जो पारदर्शिता आएगी उसका लाभ अप्रत्यक्ष कर तक ही सिमित नहीं रहेगा , निःसंदेह यह प्रत्यक्ष कर को भी सकारात्म रूप से प्रभावित करेगी । 1954 में फ्रांस से शुरू हुई जीएसटी , कंसल्टिंग कंपनी डेलॉइट के अनुसार आज विश्व में लगभग 160 देशों में किसी का न किसी रूप में लागू है , यह बात उल्लेखनिये है कि फ्रांस में इसे लागु करने के पीछे मुख्य कारण था कर - वंचन में कमी लाना। वस्तु और सेवा के लेन देन पर अप्रत्यक्ष कर लगाया जाता है और इसी लेन-देन से होने वाली लाभ पर प्रत्यक्ष कर जैसे की कॉर्पोरेट कर या आयकर लगाया जाता है। इसे और स्पष्ट शब्दों में ऐसे समझा जा सकता है कि अगर कोई वस्तु का विक्रय मूल्य 100 रूपया है तो उस पर खरीदने वाले व्यक्ति को पूरा विक्रय मूल्य पर अप्रत्यक्ष कर देना होगा वहीँ बेचने वाले को इस ल...
एक सोच इंसानियत की, एक राह सत्य की, एक रिश्ता विश्वास का, एक गीत प्रेम का, एक संदेश एकता का, एक धर्म मानवता का, एक शक्ति सहिष्णुता की, एक दृष्टि भविष्य की, एक पथ जीत का, एक आवाज़ आम आदमी की !